Hindi poem dedicated to Paash

सबसे अच्छा होता, हमारे सपनों का मर जाना

कल रात पाश मेरे सपने में आया था
मरे हुए सपनों की अर्थियां सजा रहा था
बीच बीच में फूलों को रखते हुए और
बांस के फट्टे से मुर्दा सपनों को बांधते हुए
बुदबुदाता जा रहा था,लतियाते हुए मुझको
सबसे ख़तरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना
उससे भी ख़तरनाक होता है उनकी अर्थियां न उठाना
न जलाना उनको,न पहुंचाना शमशान में जिनको
ढोते रहना लाश को,काम पर आते जाते रहना
चुपचाप देखते रहा मैं अपने तमाम मरे हुए सपनों के बीच
आग पैदा कर देने वाले उस कवि को
जो हांफने लगा अचानक, बंद हो गई उसकी धौंकनी
मुर्दा सपनों के बीच एक अधमरा सपना देख कर
फिर बुदबुदाने लगा पाश, लतियाना बंद कर दिया मुझको
गा रहा था…चीख रहा था और जल्दी जल्दी लिख रहा था
सबसे ख़तरनाक होता है, हमारे सपनों में सांसों का बच जाना
न मरना एकदम से, न उनका जिंदा कहलाना
बचे हुए के नाम पर, चंद उम्मीदों का रह जाना
सबसे ख़तरनाक होता है,मरने से पहले आखिरी सांसों का आना जाना
डाक्टर को बुलाना, जीवन बीमा को भंजाना और रिश्तेदारों को फोन करना
सबसे ख़तरनाक होता है, मरे हुए सपनों को लेकर किसी कवि को सुनना
उससे आंखें मिलाना और उसकी कविता से लजाना
राशन की दुकानों से दफ्तर की अटेंडेंस सूची में बकायेदार की तरह
हर दिन अपने नाम को पढ़ना, हर दिन किराया देना
क्या क्या खतरनाक नहीं होता पाश, लेकिन इन सबमें
सबसे खतरनाक होता है,हमारे चंद सपनों का बचे रह जाना
सबसे अच्छा होता, हमारे सपनों का मर जाना

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