sapnon ka mar jana

http://merasaman.blogspot.com/2008/09/blog-post.html

सपनों का मर जाना सामाजिक हर्ष का विषय है

 

सपनों का मर जाना
खिड़कियों से नहीं झाँकता
कि उसे झिड़ककर भेजा जा सके भीतर
या लगाए जा सकें परदे,
सपनों का मर जाना
बाहर नेमप्लेट पर नाम के नीचे
एमए एलएलबी की तरह
नंगा खुदा रहता है।

मरे हुए सपनों वाले आदमी
रात भर व्हिस्की पीकर भी
नाक की सीध में चल सकते हैं
कई किलोमीटर तक सीधे,
मरे हुए सपनों वाली औरतें
बच्चा जनने के दर्द में भी
नहीं बकती ओछी गालियाँ।
मरे हुए सपनों वाले शहर में होते हैं
बहुत से स्कूल, मन्दिर, अस्पताल और शराब के ठेके।

मरे हुए सपनों वाली कुँवारी लड़कियाँ
नहीं भागती आवारा लड़कों के साथ,
मरे हुए सपनों वाली ब्याहताएँ
अपनी पंखुड़ियों की खुशबू
तिजोरी में संभालकर रखती हैं
सिर्फ़ अपने पतियों के लिए।
मरे हुए सपनों वाले बच्चे
अच्चे बच्चे होते हैं,
मरे हुए सपनों वाले ग्रेजुएट
बनते हैं अच्छे क्लर्क, अच्छे नागरिक।

सपनों का मर जाना
सामाजिक हर्ष का विषय है।
इस दिन को
सदियों से मनाती आई हैं माँएं
संतानों के समझदार हो जाने के दिन के रूप में।

2 Responses to “sapnon ka mar jana”

  1. hamare sapane abhi jinda hain. isile kavita achhi nahi lagi

  2. divya tomar Says:

    its awesome…..i have no words to say about this poem……its amazing…….zindadil poem

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