जीवन को बेहतर बनाने का पैगाम

जीवन को बेहतर बनाने का पैगाम

Nov 11, 

चंडीगढ ; हम साहित्य को केवल मनोरंजन नहीं समझते। हमारी कसौटी पर वही साहित्य खरा उतरेगा, जिसमें उच्च चिंतन हो, स्वाधीनता का भाव हो, सौंदर्य का सार हो, सृजन की आत्मा हो, जीवन की सच्चाइयों का प्रकाश हो- जो हममें गति, संघर्ष और बेचैनी पैदा करे। सुलाए नहीं, क्योंकि अब और ज्यादा सोना मृत्यु का लक्षण है। महान कथाकार प्रेमचंद का यह कथन आज कल चंडीगढ़ की सड़कों पर सजीव होकर उभर रहा है जिसकी माध्यम हैं पुस्तकें और वाहक जनचेतना सचल पुस्तक प्रदर्शनी के कार्यकर्ता, जो सभी को किताबों और विचारों के बारे में उत्साहपूर्वक बता रहे हैं और पूरे माहौल को बौद्धिक-वैचारिक रूप से सरगर्म बना रहे हैं।

सचल पुस्तक प्रदर्शनी में आने वाले लोगों के चेहरे पर कौतूहल का भाव बढ़ता जाता है और कार्यकर्ताओं से किताबों व समाज के हालात के बारे में बात करते ही उनका अलगाव टूटता नजर आता है और कुछ ही देर में वहां आए लोगों के चेहरों पर उल्लास व उमंग की भावनाएं जाग जाती हैं।

इस सचल वाहन में विश्व कलासिक्स, रूसी पुस्तकें, मा‌र्क्सवादी साहित्य, प्रेमचंद, भगत सिंह, राहुल सांकृत्यायन, मक्सिम गोर्की, चेखव, पाश, गणेशशंकर विद्यार्थी आदि देशी-विदेशी प्रगतिशील साहित्य के अलावा जनपक्षधर कवियों की कविताओं वाले पोस्टर्स, भगत सिंह की तस्वीर वाली टीशर्ट और क्रांतिकारी गीतों के कैसेट भी हैं। यह वाहन 30 नवंबर तक चंडीगढ़ के अलग अलग कालेजों, पंजाब युनिवर्सिटी में और शाम को मोहाली के अलग अलग फेज में रहेगी।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/punjab/4_2_5933588.html

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