भगत सिंह और पाश की याद में

भगत सिंह और पाश की याद में

By विशेष प्रतिनिधि on May 29, 2011

शहीद भगत सिंह व कवि अवतार सिंह संधू ‘पाश’ की शहादत दिवस पर 23 मार्च 2011 को क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा उत्तराखंड इकाई के तत्वावधान में ‘उत्तराखंड राज्य: दशा व दिशा’ विषय पर पर्वतीय सांस्कृतिक परिषद, पैठ पड़ाव रामनगर में एक कन्वेंशन सम्पन्न हुई। इस चर्चा में उभर कर आया कि राज्य बने एक दशक हो जाने के बावजूद जनता की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। माफियाओं-तस्करों का वर्चस्व बढ़ा है और प्राकृतिक संसाधन को काॅरपोरेट घरानों के हवाले कर दिया गया है। महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पलायन विस्थापन जैसी समस्याओं से त्रस्त हैं। परेशान जनता जब आक्रोश व्यक्त करती है, तो शासन-प्रशासन दमन पर उतर आता है। सरकार किसी भी प्रकार की असहमति बर्दाश्त नहीं सुनना चाहती। वक्ताओं ने कहा सही मायने में जनता के उत्तराखंड के निर्माण के लिये एक मजबूत जन आंदोलन की जरूरत है।

कन्वेंशन को एल.एम.पाण्डे, महिला मंच की ललिता, हेम शर्मा, क्रालोस के मुनीष, आर.डी.एफ. के कुन्दन कोरंगा, सी.आर.पी.पी. के कंचन जोशी, उत्तराखंड जागरण के सम्पादक सतेन्द्र रावत, उलोवा के डॉ. डी.के काण्डपाल, पी.एस.एफ. के सुरेन्द्र चौहान, आई.एम.के. के सुरेन्द्र आर.डी.एम. के दिगम्बर पूजा सहित कई अनेक लोगों ने संबोधित किया। अध्यक्षता उत्तराखंड लोक वाहिनी के अध्यक्ष डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट, वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी व राजेन टोडरिया, प्रो. प्रभात उप्रेती तथा आर.डी.एफ. के अध्यक्ष जीवन चन्द्र ने संयुक्त रूप से की। संचालन आर.डी.एफ. प्रदेश सचिव कैसर राजा ने किया।

प्रस्तावों में पारित किया गया कि पर्यावरण मानकों के अनुसार प्रत्येक राज्य में 33 प्रतिशत भू-भाग में वन होना चाहिये, लेकिन उत्तराखंड में 65 प्रतिशत भूभाग में वन है। अतः प्रदेश के 33 प्रतिशत वन भूभाग के अतिरिक्त वन भूमि को भूमिहीन किसानों में बाँटा जाये। बेरोजगारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जायें व रोजगार न दिये जाने की स्थिति में प्रतिमाह तीन हजार रुपये न्यूनतम मासिक बेरोजगारी भत्ता दिया जाये। भू हदबंदी कानून को असरदार ढंग से लागू किया जाये तथा सीलिंग कानून के तहत प्राप्त अतिरिक्त भूमि को भूमिहीन किसानों को बाँटा जाये। सिडकुल में ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किया जाये व श्रम कानूनों को असरदार ढंग से लागू किया जाये। सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों में ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किया जाये तथा इन संस्थानों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाये। प्रदेश में निर्माणाधीन व प्रस्तावित समस्त जल विद्युत परियोजनाओं को तत्काल निरस्त किया जाये व लघु पनघट विद्युत परियोजनाओं को जन सहभागिता से बनाया जाये। नदियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हवाले न किया जाये तथा सेंचुरी, नेशनल पार्क के नाम पर जनता को जमीन से बेदखल करना बंद किया जाये। वन जीव संरक्षण अधिनियम, भारतीय वन अधिनियम 2001 जैसे काले कानूनों को रद्द कर जल-जंगल-जमीन पर जनता के पारम्परिक हक-हकूक बहाल किये जायें। शिक्षा का निजीकरण, बाजारीकरण तथा भगवाकरण बंद किया जाये व सबको समान शिक्षा व रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध करायी जाये।

http://www.nainitalsamachar.in/bhagat-singh-and-avtar-sandhu-pash-remembered/

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: