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सबहै खतरनाक ‘पाश’ ( कुमाउनी )

Posted in Paash-in Kumaoni with tags , , on December 6, 2011 by paash

Translation of Paash poem in Kumaoni language.

सबहै खतरनाक पाश‘ ( कुमाउनी )

मेहनतैकि   लूट सबहै खतरनाक नि हुनि.
पुलिसैकि  मार सबहै खतरनाक नि हुनि .
 गद्दारी लोभैकि मुट्ठि  सबहै खतरनाक नि हुनि.
बसि बस्ये पकड़ीन  ख़राब त छ.
स्यांरी भेर चुप में जकड़ीन ख़राब त छ.

पर  सबहै खतरनाक न्हा थिन .

सबहै खतरनाक हुंछ मुर्दा शांतिले भरी झान  .
तडपै नि हुन ,सब थै ल्हिन ,
घर है निकलन काम पर,

काम हैं फिरि घरी झान.
सबहै खतरनाक हुंछ,
हमर स्वीनुं क  मरि  झान.

सबहै खतरनाक उ आँख हुंछि ,
जो सब देखि भेर ले ह्यूं जसि जामि रूंछि .
जै कि   नज़र दुनियास,
प्रेमले चुमन भुलि झांछि .
जो चीजुन हैं उठनी अन्धापनै भाप में लोटि  झांछि.
जो रोजा रोजोक क्रम पी भेर ,
एक  लक्ष्यहीन  दुह्रावक उलटफेर में हरै झांछि.

सबहै खतरनाक उ हाथघड़ी छ
जो कलाई में चलति हुई लै 
हमरि नज़र में रुकी रूंछि 

सबहै खतरनाक उ दिशा हुं छि
जै में आत्माक  सूरज डुबि जांछ.

और वीक  मुर्दा घामक टुकुड़ ,
तुमार शरीराक पूरब में बुड़ि जांछ.

अवतार सिंह पाश 
( कुमाउनी अनुवाद :दीपक तिरुवा  )
 

by Deepak Tiruwa

http://bedu-pako.blogspot.com/2011/05/blog-post.html

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