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पाश का आदेश- ( अजित कुमार आजाद )

Posted in Paash-in Hindi, Paash-Poems about Paash with tags , , , , on December 6, 2011 by paash

पाश का आदेश

रात अभी भींगी नहीं थी
मेरी आंख लगी ही थी
कि पाश का तमतमाया चेहरा मेरे सामने उभरा
मैं उठकर
अपने दांये हाथ की मुट्ठी उपर उठाकर
कर ही रहा था अभिवादन
कि वह गरजे-
कहां है मेरा लोहा
जो मैंने दिया था तुम्हें हथियार के लिए

मैंने तकिये के नीचे से
एक कील और एक चाकू बढ़ाया उनकी ओर
उन्होंने फिर पूछा-
थोड़ा लोहा और होगा
-हां, उसकी बनी बन्दूक वहां टंगी है, दीवार पर

पाश ने पलटकर बन्दूक उतारी
उसे चूमा
उस पर जमी धूम झाड़ी
उसे खोल कर देखा और पूछा
इसकी गोली-
मैंने कहा-
बड़े भाई, गोली भी बना सकता था मैं
लेकिन कई सालों से नाजिम हिकमत
नहीं दे गये हैं बारुद
नेरूदा भी नहीं आये हैं कई सालों से

कुछ क्षण के लिए तो
उनके जैसा लोहे का आदमी भी रह गया था स्तब्ध
लेकिन पाश ने बन्दूक सौंपते हुए कहा-
बारूद नहीं है, शब्द तो हैं न
उसी में भरो आग
और सुनो, किसी भी कीमत पर युद्ध जारी रहनी चाहिये
मैंने आश्वस्त किया उन्हें-
हां भाई, जारी रहेगा युद्ध
और तबसे आज तक सो नहीं पाया हूं मैं

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अजित कुमार आजाद मैथिली साहित्य-संस्कृति के होलटाइमर लेखक संस्कृतिकर्मी हैं। वे साहित्य संस्कृति के इतने अनिवार्य नाम हैं कि उन्होंने अपने जीवन में इस कर्म से कभी समझौता नहीं किया। अरसा बाद उनका मुख्य संकलन ‘अघोषित युद्ध की भूमिका’ का हिन्दी अनुवाद साया हुआ है। समकालीन जीवन, इतिहास और परम्परा को देखने की अजीत की हुनरमंदी बेमिसाल है।

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